भागीरथी वृद्ध आश्रम: बुजुर्गों के सम्मान, सेवा और संवेदनशीलता का पावन केंद्र

वाराणसी।
धर्म, संस्कृति और मोक्ष की नगरी काशी एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की मिसाल बनकर सामने आई है। शहर की भीड़-भाड़ से दूर, चिरईगांव विकासखंड के मुड़ली पियरी ग्राम सभा में स्थित भागीरथी वृद्ध आश्रम उन बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक आश्रय बन रहा है, जिन्हें जीवन की सांध्य बेला में अपनत्व और देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

सेवा का संकल्प: शालिनी मेमोरियल सेवा संस्थान

इस वृद्ध आश्रम का संचालन शालिनी मेमोरियल सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को एक परिवार जैसा वातावरण देना है। ‘भागीरथी’ नाम स्वयं गंगा की उस अविरल धारा का प्रतीक है, जो निस्वार्थ भाव से जीवनदायिनी है—और यही भाव इस आश्रम की सेवा भावना में भी परिलक्षित होता है।

सुविधाएं जो जीवन को दें सुकून

मुड़ली पियरी में स्थापित यह आश्रम कुल 25 बुजुर्गों के निवास की क्षमता रखता है। यहां बुजुर्गों की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है—

सात्विक व पौष्टिक आहार: आयु और स्वास्थ्य के अनुरूप सुपाच्य भोजन

चिकित्सा व्यवस्था: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण एवं आपातकालीन उपचार

आध्यात्मिक वातावरण: भजन, कीर्तन और सत्संग से मानसिक शांति

स्वच्छ आवास: हवादार, प्रकाशयुक्त और सुरक्षित कमरे

20 स्थान अभी भी रिक्त

वर्तमान में आश्रम में 5 बुजुर्ग सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जबकि 20 स्थान अभी भी रिक्त हैं। संस्थान उन निराश्रित, असहाय अथवा अकेले रह रहे बुजुर्गों को आश्रम से जोड़ने के लिए समाज से सहयोग की अपील कर रहा है।

पारदर्शी प्रबंधन

आश्रम की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था कोषाध्यक्ष आशा दीक्षित के कुशल मार्गदर्शन में संचालित हो रही है। संस्थान का प्रत्येक संसाधन बुजुर्गों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित है।

संपर्क सूत्र

यदि कोई व्यक्ति किसी बुजुर्ग को आश्रम से जोड़ना चाहता है या इस सेवा कार्य में सहयोग करना चाहता है, तो
मोबाइल: 9415017664 (आशा दीक्षित) पर संपर्क कर सकता है।

सामाजिक जिम्मेदारी की पुकार

बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। भागीरथी वृद्ध आश्रम न केवल सेवा का केंद्र है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि सम्मान और संवेदना के साथ बुजुर्गों की देखभाल हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आवश्यकता है कि इस पहल को जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि और अधिक बुजुर्गों को जीवन की इस अवस्था में सहारा मिल सके।

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