वाराणसी। मोक्ष की कामना लेकर काशी आई तमिलनाडु के सेलम जनपद की रहने वाली राजेश्वरी (लगभग 70 वर्ष) के जीवन में उस समय गहरा संकट आ खड़ा हुआ, जब उनके 72 वर्षीय पति माणिकम का अचानक निधन हो गया। न संतान, न कोई परिजन और न ही अंतिम संस्कार के लिए कोई साधन—पति के शव के साथ वह चितरंजन पार्क में असहाय अवस्था में बैठी थीं।
इस मानवीय संकट की सूचना मिलते ही दशाश्वमेध चौकी प्रभारी अनुज मणि तिवारी ने तत्परता और संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं। चौकी प्रभारी के निर्देशन में पुलिस टीम ने न केवल शव को सम्मानपूर्वक मणिकर्णिका घाट तक पहुंचाया, बल्कि दाह संस्कार की समस्त प्रक्रिया भी विधिवत सुनिश्चित कराई।
पुलिस की इस करुणामय पहल में स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का भी सहयोग मिला। अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस के सहयोग और मानवीय व्यवहार से अभिभूत राजेश्वरी की आंखों में कृतज्ञता के आंसू छलक आए। उन्होंने वाराणसी पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विपत्ति की घड़ी में पुलिस उनके लिए परिवार बनकर सामने आई।
यह घटना वाराणसी पुलिस की संवेदनशीलता, सेवा भाव और मानवता की एक सशक्त मिसाल है—जहां कानून के साथ करुणा भी समान रूप से साथ चलती है।

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