उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा का केंद्र है—उनकी नई संगठनात्मक पहल “राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना”, जिसकी शुरुआत उन्होंने प्रदेश के 22 जिलों में कर दी है।
हालांकि नाम में आरएसएस शामिल होने के कारण इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन ओपी राजभर ने साफ कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र सामाजिक प्रशिक्षण संगठन है।
युवाओं के लिए प्रशिक्षण मॉडल
ओपी राजभर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 25 वर्ष के युवाओं में भविष्य को लेकर भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति रहती है।
उन्होंने कहा—
“युवा समझ ही नहीं पाते कि आगे क्या करना है। राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना के माध्यम से उन्हें अनुशासन, सामाजिक नेतृत्व, संगठन कौशल और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।”
सेना की वर्दी और रैंक सिस्टम भी तैयार
राजभर की इस सेना के लिए
विशेष वर्दी
रैंक के अनुसार कंधों पर सितारे
का प्रावधान किया गया है, जिससे यह कदम राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस नए कदम को राजभर की संगठनात्मक शक्ति बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजभर पहले भी अपने अप्रत्याशित राजनीतिक तेवर और रणनीतियों से चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन सेना की संरचना और अनुशासित मॉडल ने इसे और गंभीर विमर्श का विषय बना दिया है।
अभी 22 जिलों में सक्रिय, विस्तार की तैयारी
ओपी राजभर ने बताया कि यह पहल फिलहाल 22 जिलों में शुरू की गई है और आने वाले समय में इसका राज्यव्यापी विस्तार किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञ इसे
युवा ऊर्जा को संगठित करने का प्रयास,
आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि तैयार करने का शुरुआती संकेत
और
पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति
के रूप में देख रहे हैं।

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