“वाराणसी में साइबर सुरक्षा पर बड़ा अभियान: DGP का वर्चुअल संदेश, पुलिस आयुक्त ने साझा की उपलब्धियाँ”

वाराणसी। तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर नियंत्रण और जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस लाइन सभागार में बुधवार को एक व्यापक साइबर सुरक्षा एवं मिशन शक्ति जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा वर्चुअल संबोधन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

DGP ने कहा कि कोविड के बाद बढ़ी डिजिटल निर्भरता, सस्ते डेटा, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के अत्यधिक उपयोग ने साइबर अपराधों को तेज गति से बढ़ाया है। उन्होंने साइबर ठगी के चार मुख्य कारण—लोभ, लापरवाही, लत और मनोवैज्ञानिक भय (डिजिटल अरेस्ट)—बताते हुए कहा कि इनसे बचाव के लिए जागरूक रहना ही सबसे बड़ी ढाल है।

उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में ‘गोल्डन आवर’ के भीतर 1930 पर कॉल कर तुरंत सूचना दें। उन्होंने बताया कि सही ट्रांजेक्शन आईडी मिलते ही रकम को फ्रीज कर पीड़ित को नुकसान से बचाया जा सकता है। इसी प्रक्रिया से पिछले तीन महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 130 करोड़ रुपये सुरक्षित कराए हैं।
DGP ने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने और 1576 थानों पर साइबर हेल्प डेस्क सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।


कमिश्नरेट वाराणसी की उपलब्धियाँ

कार्यशाला में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी कमिश्नरेट में साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में अब तक उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है।
उन्होंने बताया—

5 फर्जी कॉल सेंटरों पर कार्रवाई, 75 अभियुक्त जेल भेजे

1400 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक

साइबर ठगी के पीड़ितों को 7.5 करोड़ रुपये वापस दिलाए

अब तक 600+ साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

नागरिकों में 50,000 साइबर ज्ञान पुस्तिकाएँ वितरित

आयुक्त ने कहा कि साइबर अपराध की रोकथाम तभी संभव है जब आम लोग तकनीकी सतर्कता और जागरूकता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।


विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी, सोशल इंजीनियरिंग, पासवर्ड एवं मोबाइल सुरक्षा, संदिग्ध लिंक की पहचान और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे विषयों पर सरल, उपयोगी एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने चेतावनी दी—
“अपना निजी डेटा किसी से साझा न करें, क्योंकि डिजिटल फुटप्रिंट कभी डिलीट नहीं होता।”


भीड़ रही उमड़ी, पुलिस की पहल सराही

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएँ, मीडिया कर्मी और नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने साइबर अपराधों से बचाव हेतु पुलिस की इस पहल की सराहना की और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

About The Author

Share the News