लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर गिरोह पर STF की बड़ी कार्रवाई, फर्जी अफसर बनकर करोड़ों ठगने वाला सदस्य गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान प्रदीप सोनी निवासी विदिशा (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। STF ने उसे गुरुवार रात गोमतीनगर विस्तार स्थित फीनिक्स पालासियो मॉल के पीछे से दबोचा।

STF के अनुसार यह गैंग पुलिस, नारकोटिक्स व क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर लोगों को धमकाता था और व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर वर्दी में दिखाई देकर खुद को ‘के. मोहनदास’ नामक अधिकारी बताता था। यह गिरोह पीड़ितों के आधार नंबरों का दुरुपयोग कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखकर बड़ी रकम वसूलता था।

गिरफ्तारी के दौरान प्रदीप के पास से दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, ATM कार्ड, ब्लैंक चेक, RC तथा ठगी में उपयोग किए गए बैंक खातों के स्क्रीनशॉट बरामद हुए। पूछताछ में उसने बताया कि वह गैंग के लिए बैंक खातों की किट जुटाता था, ATM से कैश निकालता था, रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलता और कमीशन बांटता था। उसने गिरोह को दो दर्जन से अधिक बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराई थी।

STF जांच में खुलासा हुआ कि इसी तरीके से प्रोफेसर बी.एन. सिंह से 6 से 8 अप्रैल 2025 के बीच 95 लाख रुपये ठगे गए थे। आरोपियों ने उन्हें तीन दिनों तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रखा और फर्जी RBI नोटिस दिखाकर रकम ट्रांसफर कराई। ठगी की राशि को 420 ट्रांजैक्शनों के जरिए 11 लेयर में विभिन्न खातों में भेजा गया। अब तक इस नेटवर्क से 1.40 करोड़ रुपये की साइबर ठगी जुड़ी पाई गई है।

इससे पहले STF महाराष्ट्र के ठाणे से मोहम्मद इकबाल और शाइन इकबाल को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रदीप की गिरफ्तारी के बाद अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।

अभियुक्त के खिलाफ थाना साइबर क्राइम लखनऊ में BNS की धाराओं 318(4), 319(2), 351(4), 308(2)(3)(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) तथा IT Act की धारा 66D में मुकदमा दर्ज किया गया है।

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