लखनऊ, जागरण संवाददाता।
देशभर में फैले 2000 करोड़ रुपये के कफ सिरप तस्करी सिंडिकेट पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। लखनऊ में एसटीएफ (STF) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार चल रहे बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ हाल ही में लुक-आउट नोटिस जारी हुआ था और इसके बाद से वह लगातार लोकेशन बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, आलोक सिंह ने लखनऊ कोर्ट में सरेंडर के लिए याचिका दायर करने की तैयारी की थी, लेकिन उससे पहले ही एसटीएफ की टीम ने उसे दबोच लिया। जांच एजेंसियों को उसके खिलाफ कई अहम तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्य मिले थे, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी प्राथमिकता पर रखी गई थी।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज
एसटीएफ अब आलोक सिंह से तस्करी नेटवर्क की गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सिंडिकेट के मुख्य संचालकों के बारे में पूछताछ कर रही है। माना जा रहा है कि उससे मिली जानकारी के आधार पर कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
कई राज्यों और विदेशों तक फैला नेटवर्क
ईडी की जांच में सामने आया है कि यह हाई-प्रोफाइल रैकेट कई राज्यों और विदेशी नेटवर्क की मदद से संचालित किया जा रहा था। फर्जी कंपनियों, बनावट बैंक खातों और हवाला जैसे चैनलों के माध्यम से करोड़ों रुपये का काला धन घुमाया गया। शुरुआती अनुमान के अनुसार तस्करी का यह अवैध कारोबार 2000 करोड़ रुपये से अधिक का है।
दो बड़े नामों पर सबसे ज्यादा नजर
जांच में जिन दो प्रमुख चेहरों का नाम लगातार चर्चा में है, उनमें—
शुभम जायसवाल : अभी भी फरार है। एसटीएफ और अन्य एजेंसियां उसकी तलाश में विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
अमित सिंह टाटा : कुछ दिन पहले लखनऊ से गिरफ्तार किया जा चुका है और फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
आगे और सख़्त कार्रवाई की तैयारी
एजेंसियां इस रैकेट की पूरी चेन को जोड़ने में जुटी हैं। आलोक सिंह की गिरफ्तारी को पूरे नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां तथा आर्थिक कार्रवाई की संभावना है।

More Stories
वार्षिकोत्सव में निपुण व मेधावी छात्र हुए सम्मानित
मीरजापुर में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़
योगी सरकार का बड़ा फैसला: सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में मिलेगा आयुष्मान योजना का लाभ