कफ़ सिरप तस्करी केस में सियासी घमासान तेज, पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने मांगी सीबीआई जांच

वाराणसी। कफ सिरप तस्करी प्रकरण में एसटीएफ द्वारा अमित सिंह ‘टाटा’ की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इसी बीच पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने मामले में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। धनंजय सिंह का कहना है कि उन्हें बिना कारण इस विवाद में घसीटा जा रहा है और उनके विरोधी उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

पूर्व सांसद ने कहा कि कफ सिरप मामले में कुछ पत्रकारों को भ्रामक जानकारी देकर गुमराह किया गया, जिसके कारण उनके नाम को अनावश्यक रूप से विवादों में शामिल किया गया। उनका आरोप है कि चूंकि यह प्रकरण काशी/वाराणसी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देकर गलत नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ दल प्रधानमंत्री की छवि को निशाना बनाने के उद्देश्य से दुष्प्रचार फैला रहे हैं।

राज्य सरकार करा रही कई स्तरों पर जांच

धनंजय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले की विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गहन जांच करा रही है। उनके अनुसार, यह एक बहुराज्यीय (इंटर-स्टेट) नेटवर्क का मामला है, इसलिए और व्यापक जांच की आवश्यकता है।

सीबीआई जांच की मांग

पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, बल्कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। साथ ही इससे झूठे आरोपों और अफवाहों पर भी रोक लगेगी।

धनंजय सिंह ने कहा कि वे जल्द ही इस संबंध में औपचारिक पत्र भेज रहे हैं, ताकि उन लोगों को बेनकाब किया जा सके जो राजनीतिक लाभ लेने के लिए भ्रामक प्रचार में लगे हुए हैं और राज्य सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

अमित सिंह ‘टाटा’ की गिरफ्तारी के बाद तेज हुए आरोप

गौरतलब है कि कफ सिरप तस्करी के मुख्य आरोपित अमित सिंह ‘टाटा’—जिन्हें कभी धनंजय सिंह का करीबी माना जाता था—की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने पूर्व सांसद को निशाने पर लिया था। विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया था कि टाटा को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इसी के जवाब में धनंजय सिंह ने अब अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी आरोपों को राजनीतिक साज़िश बताया है।

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