साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल ने आज एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की और कॉल सेंटरों, सिम विक्रेताओं एवं म्यूल अकाउंट्स पर सख्त निर्देश जारी किए।
बैठक में तय किया गया कि जिले में संचालित सभी कॉल सेंटरों को अपनी पूरी जानकारी स्थानीय थाने में देना अनिवार्य होगा, जिसमें कॉल सेंटर का पता, संचालक और कर्मचारियों का विवरण, कार्य का उद्देश्य और उपयोग में लाए जा रहे टेलीफोन नंबरों की सूची शामिल होगी।
पुलिस समय-समय पर इन नंबरों की साइबर क्राइम पोर्टल से जांच करेगी, और यदि किसी नंबर से धोखाधड़ी की शिकायत मिलती है, तो तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🔹 फर्जी सिम बेचने वालों पर भी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे सिम विक्रेताओं को जेल भेजा जाएगा जिनके द्वारा फर्जी नाम से सिम बेचे गए और उन सिमों का उपयोग साइबर ठगी में हुआ है।
🔹 ‘म्यूल अकाउंट्स’ की पहचान और फ्रीजिंग
सभी थाना-स्तरीय साइबर टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों की पहचान कर डेटाबेस तैयार करें, संबंधित बैंक शाखाओं से समन्वय कर ऐसे खातों को फ्रीज करें, और खाता धारकों की KYC, मोबाइल नंबर, ईमेल ID, IP लॉग्स व ट्रांजेक्शन डिटेल्स प्राप्त करें।
साथ ही इन खातों से जुड़े अन्य लिंक्ड अकाउंट्स, UPI IDs और डिजिटल वॉलेट्स की भी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि यह कदम साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।

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