रामनगर की विश्वविख्यात रामलीला के सातवें दिन शुक्रवार को सीता–राम विवाह प्रसंग और विदाई का अद्भुत मंचन हुआ। इस मौके पर तुलसीदास जी की चौपाइयों और सोरठा का भावपूर्ण पाठ कर कलाकारों ने पूरी रामलीला में भक्ति और भाव का संचार कर दिया।
तुलसीदास जी द्वारा लिखित चौपाइयों के अर्थ को मंचन के साथ जोड़ते हुए राम और सीता के मंगलमय विवाह की कथा सुनाई गई। इसमें जनकपुर के दुःख और अयोध्या की खुशी को जीवंत किया गया। महाराज जनक द्वारा पुत्रियों को पालकी में बैठाने का दृश्य, माता सुनैना की करुणा और अयोध्या में बारात के स्वागत के प्रसंग ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथा के अनुसार चारों भाइयों ने माता सुनैना से विदा ली और महाराज दशरथ ने गुरु विश्वामित्र को प्रणाम कर विदा किया। प्रसंग के अंत में माता कौशल्या द्वारा श्री राम और अन्य सात मूर्तियों की आरती कर लीला का समापन हुआ।
इस आयोजन में उपस्थित श्रद्धालु लगातार “जय श्री सीताराम”, “हर हर महादेव” और “बजरंगबली महाराज की जय” के जयकारों से गूंजते रहे। रामनगर की रामलीला के इस सातवें दिन के मंचन ने एक बार फिर सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा की झलक दिखलाई।

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