शहर में शिक्षा जगत को हिला देने वाले फर्जी डिग्री घोटाले में बड़ा मोड़ आया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (अष्टम) की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सृजन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, अग्रसेन नगर कॉलोनी, जैतपुरा के निदेशक डॉ. सुदामा पटेल को फरार घोषित कर दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी किया है और पुलिस ने उनके घर पर कुर्की की नोटिस चस्पा कर दी है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
धवकलगंज, कपसेठी निवासी संजय कुमार गुप्ता और कोपागंज, मऊ निवासी दिवाकर चौहान ने कोर्ट के आदेश पर जैतपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने छात्रों से फीस और रजिस्ट्रेशन शुल्क लेकर फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र थमा दिए।
दोनों छात्रों ने वर्ष 2015-16 में डी.फार्मा कोर्स में दाखिला लिया, संपूर्ण फीस जमा की और पढ़ाई व इंटर्नशिप पूरी की। इसके बाद उन्हें कॉलेज प्रशासन की ओर से मार्कशीट और डिग्री दी गई। लेकिन जब छात्रों ने इन्हें ऑनलाइन सत्यापित कराया तो पूरा मामला सामने आ गया — मार्कशीट और डिग्री फर्जी निकलीं।
निदेशक की भूमिका संदिग्ध
छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने निदेशक डॉ. सुदामा पटेल से शिकायत की तो उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि डिग्रियां उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल, लखनऊ में रजिस्ट्रेशन के बाद वैध दिखेंगी। लेकिन जब छात्र फार्मेसी काउंसिल पहुँचे तो उन्हें साफ जवाब मिला कि उनके सारे प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
इतना ही नहीं, आरोप है कि निदेशक ने छात्रों को बलिया निवासी गुन्जैश पाण्डेय के पास भेजा और प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹30,000 वसूलकर रजिस्ट्रेशन कराने का झांसा दिया। बाद में जब छात्र सच्चाई जानकर कॉलेज पहुँचे तो निदेशक ने उन्हें गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया।
अदालत और पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित छात्रों के अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट से प्रगति आख्या रिपोर्ट तलब करने की मांग की। विवेचक द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अदालत के आदेश पर गैर जमानती वारंट जारी कर आरोपी के घर पर कुर्की की नोटिस चस्पा कर दी है और गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है
गौरतलब है कि डॉ. सुदामा पटेल शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ राजनीति से भी जुड़े रहे हैं। वह कुछ वर्ष पूर्व वाराणसी से बीजेपी के टिकट पर एमएलसी चुनाव लड़ चुके हैं। अब फरार घोषित होने के बाद इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
यह मामला न केवल छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का है, बल्कि शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। अदालत और पुलिस की सख्ती से उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़ित छात्रों को न्याय मिलेगा और दोषियों को कड़ी सजा।

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