सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें दावा किया गया कि युवक ने EVM पर 8 बार भाजपा का बटन दबाया। अखिलेश ने इसे “सबसे बड़ा सबूत” बताते हुए चुनाव आयोग को चुनौती दी।
लेकिन सच्चाई कुछ और निकली। यह वीडियो मई 2024, फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र का है। उस समय एक नाबालिग को फर्जी मतदान करते पकड़ा गया था और उसके खिलाफ IPC की धारा 171F, 419 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं 128, 132, 136 के तहत FIR दर्ज हुई थी। यानी जिस वीडियो को अखिलेश ने “जीता-जागता सबूत” बताया, उस पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है।
चुनाव आयोग का जवाब –
चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 10 अहम बातें साफ कीं:
- आयोग के लिए न कोई पक्ष है, न विपक्ष – सब बराबर।
- आयोग पर राजनीति के लिए बंदूक रखकर निशाना साधा जा रहा है।
- आरोप लगाने वालों को सबूत देने होंगे।
- या तो हलफ़नामा दें या माफ़ी मांगें।
- “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल गलत है।
- जनता को गुमराह करना संविधान का अपमान है।
- आयोग झूठे आरोपों से डरता नहीं है।
- मतदाता सूची में त्रुटियाँ बताना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
- आयोग लगातार वेरिफिकेशन कर रहा है।
- SIR सिस्टम से डुप्लीकेट EPIC नंबर खत्म किए जाएंगे।
- भाजपा का पक्ष मज़बूत
भाजपा नेताओं का कहना है कि बार-बार फर्जी वीडियो और आधे-अधूरे सच के सहारे विपक्ष जनता को गुमराह करने की कोशिश करता है। लेकिन चुनाव आयोग ने साफ संदेश दिया है कि वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा और निष्पक्ष चुनाव कराएगा।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव का साझा किया गया वीडियो नया नहीं बल्कि पुराना मामला है, जिस पर कार्रवाई पहले ही हो चुकी थी।
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया और कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सबको “सत्य और सबूत” के साथ आना चाहिए।
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