बड़ागांव पुलिस की कथनी और करनी में अंतर की एक बानगी आज देखने को मिली। बाबतपुर के पत्रकार अवनीश मिश्रा पर कुछ दिन पहले खनन माफिया के गुर्गों ने हमला कर दिया था। इस घटना से पत्रकारों में रोष फैल गया और एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर आरोपियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की थी।
पुलिस ने उस समय पत्रकारों को आश्वस्त किया था कि आरोपियों पर ऐसी कार्रवाई होगी, जो नजीर बनेगी। मगर जब कार्यवाही का समय आया, तो पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के बाद महज शांतिभंग की धाराओं में चालान कर औपचारिकता पूरी कर दी। इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस की कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित रही।
इस उदासीन रवैये से पत्रकारों का मनोबल गिरा है और पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। पीड़ित पत्रकार अवनीश मिश्रा ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर गहरी निराशा जताई है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह की लचर कार्यवाही होती रही तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे।
वहीं पत्रकार समाज अब इस घटना को लेकर और मुखर हो गया है। वे खनन माफिया के खिलाफ संगठित होकर आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्यवाही नहीं होती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
इस घटना ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। गौरतलब है देश प्रदेश के कई जगहों पर खनन माफियाओं के द्वारा पत्रकारों पर हमले की घटनाएं होती रही है। और हर घटना की जड़ में तमाम का कारणों के साथ पुलिस की उदासीनता भी रही।
बहरहाल बड़ागांव के समेत वाराणसी के खनन माफियाओं के खिलाफ जंग जारी रहेगा।
विनय मौर्या
बनारस ।
मंडल संरक्षक
यूपी ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन

More Stories
वार्षिकोत्सव में निपुण व मेधावी छात्र हुए सम्मानित
मीरजापुर में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़
योगी सरकार का बड़ा फैसला: सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में मिलेगा आयुष्मान योजना का लाभ