लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ितों को तत्काल भोजन, इलाज और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने जिलाधिकारी (DM), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और नगर निगम से विस्तृत जवाब तलब किया है। मामले में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं—जैसे कि लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर इतनी बड़ी बस्ती कैसे बस गई, और लगभग 4 बीघा जमीन पर 1455 लोग कैसे रह रहे थे।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि इन लोगों को बिजली और गैस कनेक्शन किस आधार पर उपलब्ध कराए गए।
कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को 30 मई तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही पीड़ितों के पुनर्वास और अस्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
इस दर्दनाक हादसे में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जिस पर प्रशासन ने प्रत्येक के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की जानकारी दी है।