अखिल भारतीय मनीषी परिषद के तत्वावधान में,भगवान परशुराम जी की पावन जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर पावन वरूणा तट, रामेश्वर में आयोजित भव्य दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में उपस्थित होकर दिव्यता के इसअलौकिक क्षण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ,भगवान परशुराम जी सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के प्रहरी थे। उन्होंने यह संदेश दिया कि शक्ति का उपयोग तभी सार्थक है, जब वह धर्म की रक्षा के लिए हो। युगों से ज्ञान, तप और संस्कृति इस भूमि की आत्मा रहे हैं और जब भी इन मूल्यों पर आघात हुआ, तो समाज ने स्वयं को पुनः संगठित कर सत्य और धर्म की रक्षा की है। बल्कि संगठन की शक्ति को समझें, क्रोध नहीं, बल्कि संयम और विवेक को अपनाएं, और अपने संस्कारों व संस्कृति के प्रति जागरूक रहें। अन्याय के सामने झुकना नहीं,लेकिन न्याय के मार्ग पर चलना कभी छोड़ना नहीं।
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